Monday, 12 May 2014

कुण्डलिया छंद -- प्यारी गुड़िया

प्यारी गुड़िया चंचला ,खेले दौड़े धूप । 
नन्हे नन्हे पाँव हैं ,मनभावन है रूप ॥
मनभावन है रूप , तोतली बातें करती । 
बात बात मुस्कात ,सभी के मन को हरती॥
करे जतन से प्यार ,हमारी मुन्नी न्यारी । 
सभी लड़ाते लाड़, मोहिनी गुड़िया प्यारी ।।

3 comments:



  1. सभी लड़ाते लाड़, मोहिनी गुड़िया प्यारी
    वाह वाऽह…!
    सुंदर छंद !


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  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल मंगलवार (13-05-2014) को "मिल-जुलकर हम देश सँवारें" (चर्चा मंच-1611) पर भी होगी!
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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