Monday, 2 September 2013

क्षमादान - लघु कथा


रात के बारह बज रहे थे , रोहित नशे हालत मे घर मे दाखिल हुआ उसकी भी पत्नी साथ मे ही थी । पिता दुर्गा प्रसाद कडक कर बोले – “ ये क्या तरीका है घर मे आने का , कैसे बाप हो तुम जिसको बच्चों का भी ख्याल नहीं । और ये तुम्हारी पत्नी , इसको भी कोई कष्ट नहीं ।  रोहित तमतमा उठा न जाने क्या क्या उनको कह डाला । वे बेटे के पलटवार के लिए तैयार न थे वह भी बहू और बच्चों के सामने । सिर झुकाये सुनते रहे कुछ बोल नहीं पाये । एक वाक्य ही उन्होने अपनी पत्नी से कहा ,” हमारी परवरिश मे खोट है ।   वे कमरे मे जाकर चुपचाप लेट गए । सुबह जब उनकी पत्नी की आँख खुली तो उन्होने देखा कि दुर्गा प्रसाद जी खुली आंखो से एक टक छत को निहार रहे है।  वे बोलते हुये उठीं – “ जवान खून है आप भी नाहक ही भिड़ गए उससे वह भी उसके बीवी बच्चों के सामने । अब चलिये उठिए , मै चाय बनती हूँ आप फ्रेश होकर आइए । जब वे वॉश रूम से बाहर आई तब तक दुर्गा प्रसाद जी वैसे ही लेटे हुये थे । उन्होने पास जाकर ज़ोर से हिलाया – “अब उठिए भी    किन्तु यह क्या वे तो पत्थर हो गए थे । एकदम शांत कोई भाव नहीं किसी कोई शिकायत ही नहीं । वे तो महाप्रयाण पर चल दिये थे । बेटा बहू अब तक सोये थे । माँ की चीख सुनकर बाहर आए, माँ को पिता के शरीर से लिपट कर बिलखता देख रोहित रो पड़ा – “पिता जी इतनी बड़ी सजा दे डाली , मै तो अपनी गलती के लिए आपसे क्षमा मांगना  चाहता था ।“ माँ बिलखते हुये बोली – “ सजा कहाँ रे ! वे तो तुझे जीवन भर के लिए क्षमा दान दे गए।

14 comments:

  1. निशब्द कर दिया आपकी इस बड़ी कहानी ने.……
    आम जन जीवन को समझ के कोई क़लमकार लिखता/लिखती है,
    तो सीधी बात मन को स्पर्श करती है।
    इस कहानी ने भी वही किया है।
    सादर

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  2. सराहनीय प्रयास ....मैं साहित्यकार नहीं हूँ अत: मेरे पास ज्यादा शब्द नहीं हैं ....

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    1. आपका धन्यवाद , अपने हमारी कथा को समय दिया , पढ़ा इतना ही बहुत है आप जैसे वरिष्ठ व्यक्तियों की टिप्पणी हमारा उत्साह वर्धन करती है । सादर

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  3. मार्मिक कहानी .... आज का कटु यथार्थ

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    1. धन्यवाद संगीता दीदी ।

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  4. kya bolu shabd nahi hai.....maa baap aise hi hote hain

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    1. जी रीवा जी ! माँ बाप की जगह कोई नहीं ले सकता ।

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  5. कहानी 'लघु' है मगर दिल के तार भीतर तक छू गयी। बहुत खूब

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    1. आपका धन्यवाद ! अपर्णा जी ।

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  6. आप सभी का हार्दिक आभार ।

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  7. maataa -pitaa ki jagaha koI nah le sakata.
    Vinnie

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