Saturday, 10 May 2014

प्रभु मनुष्य संवाद - मच्छर

कुछ मुस्कुरा लें :-

गम का मारा मनुष्य
मंदिर मे पहुँच 
लगा रोने बार बार
प्रभु को दोषी ठहराने
प्रभु जी मगन
टिकाये अपने हाथ पर सीस
सोने मे लगे , वो लगा ज़ोर से घंटा बजाने
टन्न टन्न टन्न टन्न टन्न
खुली आँख प्रभु की, कसमसाये
बोले क्या है ? तूने मेरी नींद खराब कर दी
मनुष्य रोने लगा , गिड़गिड़ाने लगा
प्रभु मेरी व्यथा सुनो और
तमाम बाते भून भुनाते हुए बोल गया
प्रभु जी फिर सो गए
उसने फिर घंटा बजाया
प्रभु खिसिया गए
तेरी ही तो रोज सुनता हूँ
अपने लिए कब जीता हूँ
अब मै सो रहा हूँ तुझे चैन नहीं
तू फिर आ गया , भुनभुनाने
झल्लाहट मे बोले - बोल क्या मांग रहा है
मनुष्य बोला - प्रभु इतना कर दो
सब अच्छा अच्छा हो जाए
फिर मै नहीं भुनभुनाऊंगा
प्रभु उनींदे थे समझे नहीं
अच्छा की मच्छा समझ बैठे
और बोले तथास्तु .......और मुंह घुमा कर सो गए
उनके तथास्तु बोलते ही सब तरफ मच्छर ही मच्छर उड़ने लगे
भुनभुन करते हुए ,
मनुष्य भागा हे प्रभु ये क्या दे दिया ?
तब से आज तक प्रभु तो मजे से सोते है
और मनुष्य भागा फिरता है
मच्छरों से ............................
-------अन्नपूर्णा 'अंजु'

5 comments:

  1. बहुत सुन्दर ...!!

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  2. हा हा हा हा .....बहुत सुन्दर

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  3. आप सभी मित्रों का हार्दिक आभार ।

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