Wednesday, 2 April 2014

भजन ..... मेरे साईं


तेरी आँखों मे वो नूर है साई 
जब भी विकल हो शरण मे आई 
तूने संभाला है मुझको मेरे साईं 
गले से हर बार तूने लगाया है साईं 
मेरे साईं ............ 
बहुत जख्म खाये जहां मे हमने 
तुमने ही आके मेरी बिगड़ी बनाई 
तेरी रहमत का जलवा है बिखरा 
और तेरी कृपा का ही नूर है साईं 
मेरे साई .......
मोह  माया   मे  फंस कर भूले तुम्हें 
फिर विकल होके तुमको पुकारा है साई 
डगमगाती कश्ती न मिलता किनारा
नैया को पार तुमने लगाया है साईं 
मेरे साईं ............. 
तेरी कृपा से दीप है जलते 
सुबह ओ शाम सब तूने बनाई 
बड़ी रौनके है इस जहान मे 
तुम सा कोई रहबर नहीं मेरे  साई 
मेरे साईं ........................
तेरी कृपा से मेरी लेखनी है चलती 
तेरी ही रहमत की है रौशनाई 
मुझे शब्द रस और अलंकार दो 
और लेखन का अद्भुत संसार दो .मेरे साई 
मेरे साई ........ मेरे साईं ... ....... 

4 comments:

  1. आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल शुक्रवार (04.04.2014) को "मिथकों में प्रकृति और पृथ्वी" (चर्चा अंक-1572)" पर लिंक की गयी है, कृपया पधारें और अपने विचारों से अवगत करायें, वहाँ पर आपका स्वागत है, धन्यबाद।

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  2. आपकी यह पोस्ट आज के (०३ अप्रैल, २०१४) ब्लॉग बुलेटिन - जीवन में संगीत का महत्त्व पर प्रस्तुत की जा रही है | बधाई

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  3. ॐ साईं जय साईं जय जय साईं
    बहुत सुन्दर भजन / मन भावन भजन
    जय जय साईं राम

    एक नज़र :- हालात-ए-बयाँ: ''भूल कर भी, अब तुम यकीं, नहीं करना''

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  4. आ0 राजेंद्र कुमार जी , तुषार जी , प्रिय अभिषेक आप सभी का हार्दिक आभार ।

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