Thursday, 20 February 2014

शिरोमणि कहलाने वाले !!

कुछ त्रिपदियाँ ...

शिरोमणि कहलाने वाले !!
क्या पीड़ा हर लोगे तुम ...
 क्या व्यथाओं को समझ सकोगे तुम ?

इन चिथड़ों मे  जीवन है
चिथड़ों की हो रही चिन्दियाँ
क्या ये  चिन्दियाँ समेट सकोगे तुम  ?

भग्न हो चुका मन प्राण है
खो रही आशाओं की रशमियां
क्या रश्मियां प्रेषित कर सकोगे तुम ?

पी रहे हम हलाहल हैं
फिर क्यों कोलाहल है
क्या जीवन अमृत दे सकोगे तुम ?

शिरोमणि कहलाने वाले !!
क्या पीड़ा हर लोगे तुम ...
क्या मधुबन की खुशबू दिला सकोगे ?

अन्नपूर्णा बाजपेई 

12 comments:

  1. Aaj nirdhan vrg ki yahi sthiti hai.
    Vinnie,

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    1. सही कहा अपने विनी दी ।

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    1. आपका कथन सत्य है ।

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  3. आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल शुक्रवार (20.02.2014) को " जाहिलों की बस्ती में, औकात बतला जायेंगे ( चर्चा -1530 )" पर लिंक की गयी है, कृपया पधारें, वहाँ आपका स्वागत है, धन्यबाद ।

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  4. सुन्दर त्रिपदियाँ

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  5. inchindiyon kee baare men sochne kaa fursat hai kya kisi netaon ke paas ?
    New post: शिशु

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  6. inchindiyon kee baare men sochne kaa fursat hai kya kisi netaon ke paas ?
    New post: शिशु

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  7. बहुत बेहतरीन रचना.... !!

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  8. अनेक निरुत्तरित प्रश्नों की मनोकामना---.

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  9. ह्रदयस्पर्शी..

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  10. आप सबका अनन्य आभार ।

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