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Wednesday, 29 February 2012

rashtriya mahila sashaktikaran niti

राष्ट्रीय महिला सशक्ति करण नीति :-

इस नीति को भारत सरकार  ने २० मार्च  २००१ को स्वीकार किया था .इसका मुख्य टार्गेट महिलाओं की उन्नति ,विकास और सशक्तिकरण करना , उनके प्रति हर भेदभाव को ख़त्म करना और जीवन व् सामाजिक गतिविधियों  के हर क्षेत्र में उनकी भागीदारी को सुनिश्चित करना है. आर्थिक , सामाजिक एवं राजनैतिक क्षेत्रों में महिलाओं का सशक्तिकरण , निर्णय - निर्माण की प्रक्रिया में उन्हें शामिल किया जाना , न्यायिक कानून  व्यवस्था को उनके प्रति संवेदनशील बनाना , उनके प्रति सब प्रकार की हिंसा को को ख़त्म करना ,इन सबके अलावा बालिकाओं को जन्म के साथ ही उनके सम्पूर्ण मौलिक अधिकारों की प्राप्ति , में  सभी इस नीति के मुख्य बिंदु हैं .

१) महिलाओं के पूर्ण विकास के लिए आर्थिक एवं
सामाजिक नीतियों के माधयम से एक ऐसा वातावरण तैयार करना जिससे वे अपनी पूर्ण क्षमताओं की पहचान कर सकें .
२)  राजनीतिक , आर्थिक , संस्कृतिक , सामाजिक एवं प्रशासनिक सभी क्षेत्रों में महिलाएं पुरषों के सामान ही अपनी मूलभूत स्वतंत्रताओं   व् मानवाधिकारों का , जो वैधानिक शक्तियों से उन्हें मिलें हैं , वे वास्तव में उपभोग कर सकें .

३) राष्ट्र के राजनितिक , आर्थिक , सामाजिक क्षेत्र  में महिलाओं की बराबर पहुच हो , और निर्णय निर्माण की प्रकिया में उनकी बराबर की भागीदारी हो .

४)  स्वस्थ्य चिकित्सा , सभी स्तरों पर शिछा , व्यावसायिक शिछा , सामाजिक सुरछा व् सार्वजनिक कार्यक्रमों तक महिलाओं की पहुच हो .

५)  महिलाओं के प्रति सभी प्रकार की हिंसा को ख़त्म करने के लिए न्याय व्यवस्था तथा कानून व्यवस्था को मजबूत करना .

६)  स्त्री व् पुरुष दोनों के साझा प्रयासों से सामाजिक द्रष्टिकोण और सामुदायिक परम्पराओं व् रीति रिवाजों को बदलना .

७)  विकास प्रक्रिया  में महिलाओं के लैंगिक द्रष्टिकोण को  मुख्यधारा में लाना .

८) महिलाओं और बालिकाओं  के प्रति हर प्रकार के भेदभाव और हिंसा को ख़त्म करना .

९)  नागरिक समाज , विशेष कर महिला संगठनों के साथ भागीदारी को और अधिक मजबूत करना .

नीति के इन बिन्दुओं को हासिल किया जा सके इसके  लिए मानव संसाधन मत्रालय ने कार्य योजना का मसौदा तैयार किया है . इसमें नीति के  लक्ष्यों को २०१० तक पाने की बात है . इनको आगे और बढ़ाने  तथा संसाधन मुहैया करने की प्रतिबद्धता जताई गई है .


देखने वाली बात ये है कि ये कहाँ तक सफल है । क्या महिलाएं सचमुच ही इन नीतियों के प्रति स्वयं जागरूक है या नहीं । यदि नहीं तो उन्हे अब जागरूक होने की अत्यन्त आवश्यकता है ।



यदि आप सब सहमत है तो अपने कमेन्ट नीचे दिये कालम मे अवश्य लिखें ।