Monday, 27 January 2020

बाल यौन उत्पीड़न समस्या एवं समाधान



बाल यौन उत्पीड़न समस्या एवं समाधान
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वैश्विक पटल पर दृष्टिपात करें तो न केवल भारत अपितु सम्पूर्ण विश्व में बच्चों के साथ होने वाले दुर्व्यवहार और शोषण की बातें अगर घर या विद्यालय की चहारदीवारी में ही रहे तो अच्छा है समाज की ऐसी सोच रही है ताकि न तो स्कूल और न ही घर की इज्जत खराब हो, बाल यौन शोषण हो या स्त्रियॉं लड़कियों के साथ दुराचार के मामले । हमारे समाज द्वारा इसे नजरंदाज करने की वजह से भारत में भी बाल यौन शोषण की घटनाएं बहुत तेजी से बढ़ रही हैं। इस प्रकार की घटनाओं के विभिन्न आयाम हैं जिसके कारण समाज इसका सामना करने में असमर्थ है। बाल यौन शोषण न केवल पीड़ित बच्चे पर अपना गहरा प्रभाव छोड़ता है बल्कि पूरे समाज को भी प्रभावित करता है। भारत में बाल यौन शोषण के बहुत से मामलों को दर्ज नहीं किया जाता, क्योंकि ऐसे मामलों को सार्वजनिक करने पर परिवार खुद को असहज महसूस करता है। बाल यौन शोषण की बात के सार्वजनिक हो जाने पर परिवार की गरिमा के खराब होने के बारे में लगातार भय बना रहता है। ऐसे में बाल संरक्षण आयोगों की मानें तो बच्चे की पहचान खोने या उसके बदनाम होने का खतरा बना रहता है।
अमेरिका के इलिनोइस राज्य में करीब 700 पादरियों पर बच्चों के यौन शोषण का आरोप 
केरल के एक सरकारी टीचर दो छात्रों के साथ यौन शोषण के आरोप में गिरफ्तार किया गया ।
वारंगल: 9 महीने की बच्ची को अगवा करने के बाद यौन शोषण, गला दबाकर की हत्या
मुंबई के बांद्रा से एक 45 वर्षीय महिला को 12 साल के लड़के के कथित यौन उत्पीड़न के आरोप में गिरफ्तार किया गया ।
अभी कुछ दिनों पूर्व टीवी पर एक और न्यूज देखी ; तीन माह की बच्ची के साथ उसके घर के किसी सदस्य ने किया बलात्कार जिससे उसकी मौत हो गयी । आमतौर पर आजकल इस तरह की अनेक घटनाएँ सामने आ रही हैं । समझ में नहीं आता कि लोगों को क्या हो गया है लोग अपने घर की बच्चियों तक को नहीं बख्शते । ऐसी वीभत्सता ! लोगों के दिलों से मानवीयता , शर्म और संस्कार का नामोनिशान तक मिट गया है ।    
क्या है बाल यौन शोषण या पिडोफिलिया;
रोगों के अंतरराष्ट्रीय वर्गीकरण (आईसीडी) ने पीडोफिलिया को "वयस्क व्यक्तित्व और व्यवहार के विकार" के रूप में पारिभाषित किया है, जिसे हम मनोरोग भी कह सकते है,  जिसमें छोटे उम्र के किशोरों या बहुत छोटे उम्र के बच्चों के प्रति यौन रूचि होती है।
डाइगनोस्टिक एंड स्टेटिसटिकल मैनुअल ऑफ मेंटल डिसऑर्डर्स (DSM) के अनुसार पीडोफिलिया एक पैराफिलिया है जिसमें एक व्यक्ति छोटे बच्चों की ओर भावुक और बारम्बार यौन आग्रहों की दिशा में कल्पनाशील हो जाता है और जिसके बाद वह यथार्थ में इसे पूरा करते है जो संकट का कारण होता है। हालांकि यह विकार ज्यादातर पुरुषों में होता है,  कुछ महिलाओं में भी यह विकार पाया जाता है। रोगी के द्वारा किए गए काम में आम तौर पर संभोग नहीं होता है, लेकिन उसे छूने या रोगी के साथ कार्य प्रदर्शन करने के लिए बच्चे को उकसाने का काम करता है। जिससे बच्चे को नुकसान पहुंचता है यदि बड़ा बच्चा हुआ तो वह शारीरिक पीड़ा झेलता है और यदि वह बहुत छोटा बच्चा या बच्ची है तो वह झेल नहीं पाता /पाती, उसकी मौत हो जाती है । देखा जाये तो यह महज एक क्षणिक आवेग का नतीजा होता है जिसकी सजा बच्चों के माता पिता को जीवन पर्यन्त भोगनी पड़ती है ।  

समाधान
1-      अमेरिका ऑनलाइन बाल पॉर्नोग्रफी और बाल यौन उत्पीड़न से संबंधित किसी भी विषय के प्रसार पर लगाम लगाने में भारत की मदद करे ।
2-      कानून प्रवर्तन एजेंसियां साइबर जगत से बाल पॉर्नोग्रफी एवं बाल यौन शोषण सामग्री को भी हटायेँ
3-  अमेरिका में ही 7 राज्य ऐसे हैं जहां केमिकल कैस्ट्रेशन का इस्तेमाल होता है। यौन अपराधियों को नपुंसक बनाने की सजा दक्षिण कोरिया और इंडोनेशिया में भी है। कुछ अन्य देशों में यौन अपराधियों के लिए बेहद सख्त कानून है। कुछ ऐसे ही कानून भारत में भी बनाए जाये।
4-  ऐसे मनोरोगी मासूम बच्चे के दिमाग में बैठे डर का लाभ उठाते हैं, वो बेचारे मासूम जिसे यौन उत्पीड़न के बारे में कोई जानकारी नहीं होती वो दिन प्रतिदिन इस का शिकार होता है। इसके लिए माता-पिता अपने बच्चों की बात भी सुनें, उन्हे खुलकर सम्बन्धित विषय को बता दें तथा ऐसी किसी भी परिस्थिति में फँसने पर कैसे वे खुद को बचाएं यह भी बतायें ।
5-      शैक्षिक संस्थानों को भी जागरूकता कैंप आयोजित करने चाहिये जो सेक्सुएलिटी विषय पर सटीक जानकारी प्रदान करने में सहायक हो।
6-      बाल यौन शोषण एक अपराध है अपराधी भारी दंड के बिना छूट न जायें इसके लिये कानूनों और धाराओं को और अधिक कड़ा करना होगा।
7-   पुलिस या चाइल्ड लाइनबच्चों को उचित सलाह तथा कानूनी सेवाएं उपलब्ध कराती है, इसके लिए जनसमुदाय का समर्थन प्राप्त कर कदम बढ़ाए जायें।
8-      अंतिम उपाय के रूप में मीडिया को सूचित करना, अपने कानून के बारे में जानकारी प्राप्त करें। सबसे महत्वपूर्ण बात यह कि आधारभूत कानून एवं उस अधिकार के बारे में जानकारी प्राप्त करें जिनकी रक्षा की जानी है।
 यदि आप बाल अधिकार तथा उसकी संरक्षा के लिए बने कानून से परिचित हैं तभी आप बच्चे या उसके मां-बाप या संरक्षक या जनसमुदाय को कानूनी कारवाई के लिए तैयार कर सकते हैं। कभी-कभार पुलिस या प्रशासन भी इस तरह के मामलों में बाधा उत्पन्न करते हैं। कानून के बारे में उचित जानकारी मामले को अच्छी तरह से हल करने में आपको सशक्त बनाता है।

प्रेषिका –
अन्नपूर्णा बाजपेयी
वरिष्ठ साहित्यकार एवं अध्यक्ष शक्ति ब्रिगेड


2 comments:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल बुधवार (29-01-2020) को   "तान वीणा की माता सुना दीजिए"  (चर्चा अंक - 3595)    पर भी होगी। 
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    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है। 
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    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'  

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    1. आपका हार्दिक आभार आदरणीय ! मैं देख नहीं पायी इसके लिए मैं हृदय तल से क्षमा चाहती हूँ ।

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